Friday, August 1, 2025

मैं फूल हूँ, मैं खुश हूँ



मैं फूल हूँ, मैं खुश हूँ

मैं फूल हूँ, मैं खुश हूँ,
कभी सजा देता हूँ किसी का सिर,
कभी बिखरा मिलता हूँ राहों में,
फिर भी ना शिकवा, ना कोई मलाल।
मैं फूल हूँ, मैं खुश हूँ।

कुचले जाने पर भी मुस्काता हूँ,
पैरों तले आकर भी महक जाता हूँ,
दर्द छुपाकर भी रंग बिखेरता हूँ,
मैं हर हाल में खुद को निखारता हूँ।
मैं फूल हूँ, मैं खुश हूँ।

कभी पूजा की थाली में सजता हूँ,
कभी किसी की विदाई में भीगता हूँ,
कभी प्रेम का संदेश बन जाता हूँ,
कभी शोक में भी साथ निभाता हूँ।
मैं फूल हूँ, मैं खुश हूँ।

कोई मुझसे प्रेम से पेश आए,
या मुझे यूँ ही ठुकरा दे,
मैं न तो रुकता हूँ, न ही टूटता हूँ,
हर परिस्थिति में मुस्कुराता हूँ।
मैं फूल हूँ, मैं ऐसा ही हूँ,
मैं फूल हूँ, मैं खुश हूँ।

अश्वनी कुमार 

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