Friday, August 1, 2025

मैं फूल हूं मैं खुश हूं।

मैं फूल हूं
मैं खुश हूं।
कभी गिरता हूं किसी के गले में।
कभी रास्तों में बिखरा पड़ा रहता हूं।
मैं फूल हूं।
मैं खुश हूं।
मुझेँ शिकायत करनी ही नहीं आती।
चाहे कुचला जाऊं पांव के नीचे।
मैं फूल हूं।
मैं खुश हूं।
किसी की खुशी में खुश रहता हूं।
तो दुख में भी साथ निभाता हूं।
मैं फूल हूं।
मैं ऐसा ही हूं।
कोई पत्थर पर चढ़ाएं।
या फिर मर्जी से ठुकराए।
मैं फूल हूं।
मैं खुश हूं।


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